अध्याय 85

कैटनिस जैसे ही सेड्रिक के पास से कंधा छुआकर निकली, उसी पल उसकी आँखों में अँधेरा उतर आया। उसका हाथ चाबुक की तरह झपटा और उँगलियाँ उसकी कलाई पर कसकर जकड़ गईं—इतनी ज़ोर से कि दर्द उतर आया।

“मेरे साथ हो तो इतना उदास चेहरा, और यहाँ बाहर आकर इतनी मस्ती?” उसने ठंडी हँसी के साथ कहा; उसके चेहरे पर ईर्ष्या की...

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